जीविका के जिला इकाई सभागार में सोमवार को जेंडर सेंसिटाइजेशन एवं नई चेतना 4.0 विषय पर जिला-स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

जीविका के जिला इकाई सभागार में सोमवार को जेंडर सेंसिटाइजेशन एवं नई चेतना 4.0 विषय पर जिला-स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों, न्याय तक उनकी पहुंच तथा जेंडर-संवेदनशील प्रणालियों को सशक्त बनाने हेतु विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय को और मजबूत करना था।

कार्यशाला में वन स्टॉप सेंटर (OSC) से कुसुम सिंह (सेंटर एडमिनिस्ट्रेटर) एवं पुष्कर कुमार सुमन, तथा लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम से ओम प्रकाश पासवान (चीफ) की सहभागिता रही। इसके साथ ही दीदी अधिकार केंद्र के कोऑर्डिनेटर, जेंडर CRPs, सभी 14 प्रखंडों के BPM एवं जिला स्तरीय अधिकारी शामिल हुए।

सत्र की शुरुआत दीदी अधिकार केंद्र (DAK) की कार्यप्रणाली की विस्तृत समीक्षा से हुई। पूर्णिया जिले के सात प्रखंडों में संचालित ये केंद्र महिलाओं को न्याय तक पहुंच, शिकायत निवारण तथा जेंडर समानता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस दौरान विभिन्न श्रेष्ठ प्रथाओं (Best Practices) को साझा किया गया।

इसके बाद नई चेतना 4.0 पर चर्चा की गई, जिसमें समुदाय स्तर पर जेंडर सेंसिटाइजेशन के विभिन्न दृष्टिकोणों पर फोकस किया गया। इंटरएक्टिव लर्निंग के अंतर्गत OSC अधिकारियों द्वारा महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के मामलों में उपलब्ध समग्र सहायता सेवाओं की जानकारी दी गई, जिसमें रेस्क्यू सेवाएं, चिकित्सा सहायता, काउंसलिंग, अस्थायी आश्रय एवं कानूनी सहायता शामिल हैं। साथ ही पीड़ित महिलाओं के लिए एकीकृत प्रतिक्रिया प्रणाली (Integrated Response Mechanism) के महत्व पर बल दिया गया।

प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण टोल-फ्री हेल्पलाइनों जैसे 121, 181 एवं 1098 की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे कन्या उत्थान योजना, बाल संरक्षण योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना एवं सामाजिक पुनर्वास सहायता योजना के बारे में भी अवगत कराया गया।

OSC टीम द्वारा हिंसा प्रकरण रजिस्टर (Violence Case Register) एवं फॉलो-अप रजिस्टर के संधारण के महत्व पर प्रकाश डाला गया, जिससे मामलों की नियमित निगरानी एवं पीड़ितों को समयबद्ध सहायता सुनिश्चित की जा सके।

कार्यशाला के दौरान DALSA (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) के प्रतिनिधियों ने पीड़ितों के लिए उपलब्ध सेवाओं की जानकारी दी, जिसमें निःशुल्क कानूनी सहायता, परामर्श, कानूनी प्रतिनिधित्व तथा न्याय तक पहुंच के लिए सहयोग शामिल है।कार्यशाला का समापन सभी हितधारकों द्वारा आपसी समन्वय को सुदृढ़ करने, रेफरल तंत्र को मजबूत करने तथा महिलाओं के लिए समयबद्ध एवं पीड़ित-केंद्रित सहायता सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ किया गया।

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