युद्ध जैसी स्थिति से निपटने को तैयार पूर्णिया, ‘ब्लैकआउट’ और ‘मॉक ड्रिल’ का सफल आयोजन

युद्ध जैसी स्थिति से निपटने को तैयार पूर्णिया, ‘ब्लैकआउट’ और ‘मॉक ड्रिल’ का सफल आयोजन

पूर्णिया (बिहार):भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देश पर आज पूर्णिया जिले में नागरिक सुरक्षा (Civil Defence) और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए एक वृहद अभ्यास किया गया। जिले ने सफलतापूर्वक ‘ब्लैकआउट’ और ‘मॉक ड्रिल’ के माध्यम से अपनी आपातकालीन मुस्तैदी का लोहा मनवाया।

एयर रेड अर्ली वार्निंग सिस्टम और सुरक्षित निकासी का हुआ सघन अभ्यास।
15 मिनट का संपूर्ण ब्लैकआउट शाम 7:00 से 7:15 बजे तक बुझाई गईं शहर की बत्तियां; रेलवे स्टेशन से लेकर निजी अस्पतालों तक ने दिया सहयोग।
SDRF, NCC, सिविल डिफेंस और जिला प्रशासन की टीमों ने अलग-अलग परिदृश्यों पर किया मॉक ड्रिल।
जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में गुलाबबाग मंडी से लेकर पूर्णिया विश्वविद्यालय तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन।


आज का यह विशेष आयोजन मुख्य रूप से छह आपातकालीन स्थितियों पर केंद्रित था। इसमें वायु सेना की पूर्व चेतावनी प्रणाली मिलने पर लोगों को सुरक्षित आश्रयों (Shelters) तक पहुँचाने, मलबे में दबे लोगों की खोज (Search & Rescue), और घायलों को त्वरित चिकित्सा सहायता देने का सफल प्रदर्शन किया गया।

दिनभर के अभ्यास का शेड्यूल:

  1. गुलाबबाग मंडी: सुबह 10 बजे औद्योगिक सुरक्षा का परीक्षण।
  2. जिला स्कूल व विश्वविद्यालय: दोपहर में छात्रों और कर्मियों के साथ सुरक्षित निकासी का अभ्यास।
  3. आर.एन. साह चौक व रंगभूमि मैदान: शाम को सड़क पर सघन सुरक्षा ड्रिल।

ब्लैकआउट के दौरान थम गया शहर

अभ्यास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शाम का ‘ब्लैकआउट’ रहा। विद्युत विभाग ने समन्वय स्थापित कर बिजली काटी, जबकि पुलिस और परिवहन विभाग ने वाहनों के परिचालन को पूरी तरह रोक दिया। निजी अस्पतालों ने भी खिड़कियों पर पर्दे डालकर प्रकाश को बाहर जाने से रोका, जो युद्ध काल में सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण कदम है।

कंट्रोल रूम से हुई निगरानी

जिला प्रशासन का नियंत्रण कक्ष (06454-241555) चौबीसों घंटे सक्रिय रहा। सायरन की गूँज और लाउडस्पीकर के माध्यम से नागरिकों को जागरूक किया गया। इस मौके पर प्रभारी जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त और जिले के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।

“इस अभ्यास का उद्देश्य किसी भी बाहरी हमले या आपदा की स्थिति में विभागों के बीच आपसी तालमेल और तकनीकी उपकरणों की कार्यक्षमता को जांचना था, जिसमें पूर्णिया प्रशासन पूरी तरह सफल रहा।”

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