पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के संरेखण में बदलाव की खबरें पूरी तरह भ्रामक , समस्तीपुर जिले में मूल स्वीकृत संरेखण के तहत ही हो रहा है भूमि अधिग्रहण
पथ निर्माण विभाग मीडिया /डिजिटल मीडिया (विशेष रूप से ‘इंडियन एक्सप्रेस’) में प्रकाशित उन खबरों का पूरी तरह से खंडन और स्पष्टीकरण करता है, जिनमें दावा किया गया है कि समस्तीपुर जिले में पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के संरेखण (Alignment) में कोई बदलाव या संशोधन किया गया है।
विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पाल ने स्पष्ट किया है कि किलोमीटर 48+000 से किलोमीटर 53+000 के बीच संरेखण में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव या विचलन (Deviation) नहीं किया गया है। भूमि अधिग्रहण की वर्तमान में जारी पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से मूल रूप से स्वीकृत संरेखण के अनुसार ही संचालित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस महात्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे परियोजना का संरेखण पूरी तरह से सामाजिक-आर्थिक कारकों, तकनीकी व्यवहार्यता और भारतीय सड़क कांग्रेस के कड़े दिशानिर्देशों के आधार पर तय किया गया है। इस संरेखण को ‘संरेखण समिति’ (Alignment Committee) द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श के बाद मंजूरी दी गई थी, जिसमें सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव (Secretary MoRTH), एनएचएआई के अध्यक्ष (Chairman NHAI) और महानिदेशक (Director General MoRTH) शामिल हैं।
यह समिति डीपीआर परामर्शी द्वारा प्रस्तुत व्यवहार्यता रिपोर्ट की विशेषज्ञों द्वारा गहन संवीक्षा (Scrutiny) करने के बाद सर्वोत्तम विकल्प का चयन करती है। इस एक्सप्रेसवे के संरेखण को समिति द्वारा 15 जनवरी, 2025 को ही अंतिम रूप से मंजूरी दे दी गई थी। स्वीकृत संरेखण के आधार पर ही समस्तीपुर जिले के संबंधित गांवों और भूखंडों के लिए वैधानिक अधिसूचनाएं जारी की गई हैं। समाचार पत्र में लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार है।
सचिव ने बताया कि परियोजना के किलोमीटर 48 से 53 के बीच किसी के प्रभाव में संरेखण बदला का दावा जमीनी हकीकत और तथ्यों से पूरी तरह परे है। CH. 48+000 किमी से 53+000 किमी के बीच संरेखण में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हाल ही में दिनांक 06.03.2026 को प्रकाशित 3A अधिसूचना उसी मूल संरेखण पर आधारित है जिसे जनवरी 2025 में मंजूरी मिली थी। समाचार पत्र में दिखाया गया कथित संरेखण मानचित्र वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं है। साथ ही, के.एस.आर. कॉलेज की मुख्य भवन पूरी तरह से सुरक्षित है। एक्सप्रेसवे के मार्ग के कारण कॉलेज की केवल कुछ खाली भूमि का हिस्सा ही अधिग्रहण के दायरे में आ रहा है, जिससे मुख्य कॉलेज भवन को कोई नुकसान नहीं होगा।
वर्तमान संरेखण का चयन करते समय मानवीय विस्थापन को न्यूनतम रखने का पूरा प्रयास किया गया है। प्रारंभिक मैपिंग के अनुसार, वर्तमान स्वीकृत संरेखण में केवल 65 आवासीय/व्यावसायिक ढांचे प्रभावित हो रहे हैं। इसके विपरीत, यदि समाचार पत्र में कथित रूप से दर्शाए गए वैकल्पिक मार्ग को अपनाया जाता, तो कम से कम 200 से अधिक निर्मित ढांचे इसकी चपेट में आते, जिससे बड़े पैमाने पर स्थानीय लोग विस्थापित होते।
सचिव श्री पंकज कुमार पाल ने स्पष्ट कहा कि पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। जनता और हितधारकों से अनुरोध है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों और अफवाहों पर ध्यान न दें।

