साथी एवं जिला बाल संरक्षण इकाई पूर्णिया के संयुक्त तत्वाधान में विद्यालय एवं पूर्व विद्यालयी सशक्तिकरण में विभिन्न हितग्राहियों की भूमिका पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन जिला मुख्यालय में किया गया।
आयोजित कार्यशाला की शुरुआत श्री अमरेश कुमार सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई,श्री सुमित प्रकाश, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, श्री विवेक कुमार, बाल संरक्षण पदाधिकारी और साथी के निदेशक श्री कालेश्वर मंडल द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए सहायक निदेशक बाल संरक्षण अमरेश कुमार ने कहा कि बाल अधिकार को सुनिश्चित करने कि दिशा में यह सराहनीय पहल है।
उन्होने कार्यशाला में कहा कि विद्यालय और आंगनवाड़ी से बाहर बच्चों कि सूची तैयार करें और उनके परिवार के साथ मिलकर उनसे परामर्श करें।उन्होंने बताया कि जिला बाल संरक्षण इकाई बच्चों के क्षेत्र में कार्य करने लिए नोडल इकाई है ।सभी विभागों के साथ साथ सरकारी गैर संगठनों के सहयोग से बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने की आवश्यकता है ।
उन्हें शिक्षा के महत्व को साझा करें और उनके बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए उत्साहित करें।
उन्होंने कहा कि संकटग्रस्त बच्चों की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1098,बाल कल्याण समिति अथवा जिला बाल संरक्षण इकाई को त्वरित दें। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह निषेध हेतु शपथ भी दिलाया।
उन्होंने बताया कि जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित परवरिश योजना अंतर्गत अधिक से अधिक योग्य लाभुकों को जोड़ने की आवश्यकता है। इसके लिए जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा सर्वे किया जा रहा है। विदित हो कि योजना अंतर्गत अनाथ बच्चे /एचआईवी एड्स से पीड़ित माता पिता के बच्चें अथवा स्वयं बच्चें/ कुष्ठ रोग से पीड़ित माता-पिता के बच्चें को योजना का लाभ देने का सरकार द्वारा प्रावधान है और दिया जा रहा है।

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सुमित प्रकाश ने कहा कि जहाँ बाल मजदूर, बाल तस्करी या बाल विवाह जैसे मामलें दिखाई दे तो उसे रोकने के लिए माता समिति, स्वयं सेवी संगठन और समुदाय के लोगो को सघन तरीके से जागरूक करने कि जरुरत है । लोगो को 1098 के बारे में भी बताने कि जरुरत है।इस का गहन प्रचार प्रसार कराने पर बल दिया गया।
बाल संरक्षण पदाधिकारी विवेक कुमार ने कहा कि गाँव स्तर पर बाल संरक्षण समिति को सशक्त करने कि जरुरत है ताकि बाल संरक्षण की समस्या की पहचान गाँव स्तर पर हो और हर आदमी अपने समुदाय के बच्चों के प्रति संवेदनशील हो।
साथी के निदेशक कालेश्वर मण्डल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा की विद्यालय और पूर्व विद्यालय को सशक्त करने के लिए सभी हितग्राहियो को एक प्लेटफार्म पर आकर काम करने की जरुरत है ।ताकि जलालगढ़ और कसबा नहीं बल्कि पुरे पूर्णिया को बाल अधिकार के क्षेत्र में एक मॉडल रूप दिया जा सके।
एल पी ओ अब्दुल रहीम ने बाल संरक्षण के कानूनी पहल के बारे में बताया गया।

माता समिति के अध्यक्ष रूपा देवी ने कहा कि मैं अपने गाँव में माता समिति के माध्यम से गाँव के हर बच्चों का प्रोफाइल तैयार कर लिए है और सभी बच्चों का मूल्यांकन करती हूं और माता समिति के सदस्य रोटेड सिस्टम से विद्यालय और आंगनबाड़ी का अनुश्रवण करते है। बाल संसद के बच्चों ने खेल के माध्यम से अपनी सफर को साझा किया और राज्य से लेकर राष्ट्र तक का सफर तय किया।
कार्यशाला में स्वयं सेवी संगठन प्रतिनिधि, शिक्षक, माता समिति के सदस्य, चाइल्ड लाइन, ऑन स्टॉप सेंटर,टीम के पूजा, खुशबु, प्रियंका, अनामिका, नूतन, जीवन, रंजीत मौजूद थे. संचालन मीना कुमारी और धन्यवाद ज्ञापन साथी के प्रबंधक भाग्यश्री मिश्रा ने किया।

