किशोरों एवं युवाओं की एकजुटता ने डिजिटल हिंसा के खिलाफ मुहिम में फूंकी नई जान

किशोरों एवं युवाओं की एकजुटता ने डिजिटल हिंसा के खिलाफ मुहिम में फूंकी नई जान

डिजिटल हिंसा के खिलाफ “रन फॉर वीमेन” का आयोजन
डिजिटल हिंसा पर दी गई विस्तृत जानकारी

पटना, 04 दिसंबर: आज के समय में जहां तकनीक ने दुनिया को जोड़ने का काम किया है, वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती हिंसा, उत्पीड़न और महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन दुर्व्यवहार एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। इसी पृष्ठभूमि में सहयोगी संस्था द्वारा पटना जिले के बिहटा प्रखंड के सिमरी पंचायत में “रन फॉर वीमेन” जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्था द्वारा चलाए जा रहे 16 दिवसीय अभियान का अहम हिस्सा था, जिसका उद्देश्य जेंडर गैर-बराबरी, डिजिटल हिंसा और ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति समुदाय तथा युवाओं में व्यापक चेतना फैलाना था।

किशोरों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्व किया प्रतिभाग:

डिजिटल हिंसा के संदर्भ में विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया, इंटरनेट और तकनीक के विस्तार ने जहां नई संभावनाएँ खोली हैं, वहीं महिलाएं और लड़कियाँ साइबर-स्टॉकिंग, ऑनलाइन यौन उत्पीड़न, धमकी, फेक प्रोफ़ाइल, अशोभनीय संदेशों, निजी तस्वीरों के दुरुपयोग और डीपफेक वीडियो जैसी समस्याओं का शिकार हो रही हैं। इन घटनाओं के गंभीर मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ते हैं। ऐसे में गांवों और कस्बों में डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाना समय की बड़ी आवश्यकता बन गया है।इसी सोच के साथ आयोजित “रन फॉर वीमेन” कार्यक्रम में करीब 70 युवाओं और किशोरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश था— “सभी महिलाओं के खिलाफ डिजिटल हिंसा को समाप्त करने के लिए एकजुट हों।”
दौड़ में शामिल युवाओं ने हाथों में जागरूकता संदेश लिखे पोस्टर लिए और सिमरी पंचायत की गलियों एवं मुख्य मार्गों से गुजरते हुए लोगों को डिजिटल सुरक्षा और लैंगिक समानता के प्रति जागरूक किया।

डिजिटल हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद करने पर दिया जोर:

कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने इस पहल को न केवल उपयोगी बल्कि समाज के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
प्रेम कुमार ने कहा, “डिजिटल सुरक्षा हमारी व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी है। अगर हम स्वयं जागरूक होंगे तो अपने परिवार और समुदाय को भी सुरक्षित रख पाएंगे।”
प्रिंस कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को आगे आकर डिजिटल हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए। “हम इसलिए दौड़ रहे हैं ताकि समाज समझे कि ऑनलाइन उत्पीड़न भी उतना ही गंभीर अपराध है जितना ऑफलाइन हिंसा।”
विक्की कुमार ने कहा, “डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए जागरूक और सतर्क रहना बेहद जरूरी है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं में सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी का भाव पैदा करते हैं।”

डिजिटल हिंसा के खिलाफ सामाजिक एकजुटता जरूरी:
सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल हिंसा आज के समय की सबसे गंभीर और तेजी से बढ़ती समस्याओं में से एक बन चुकी है। उन्होंने कहा, “आज फेक अकाउंट, मॉर्फ्ड इमेजेज, ऑनलाइन ट्रोलिंग और धमकी जैसी घटनाएँ आम होती जा रही हैं। यह केवल तकनीकी मुद्दा नहीं बल्कि महिलाओं की गरिमा, स्वतंत्रता और सुरक्षा से जुड़ा सामाजिक प्रश्न है।” रजनी ने बताया कि संस्था का लक्ष्य किशोरों, युवाओं और समुदाय को डिजिटल सुरक्षा के तरीकों, अधिकारों, जोखिमों और शिकायत निवारण तंत्र के बारे में जागरूक करना है ताकि हर व्यक्ति सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने में अपनी भूमिका निभा सके।

“रन फॉर वीमेन” जागरूकता कार्यक्रम ने सिमरी पंचायत में डिजिटल हिंसा के प्रति संवाद की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम न केवल युवाओं को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने में सफल रहा, बल्कि समुदाय के भीतर महिलाओं के प्रति सम्मान, लैंगिक समानता और सुरक्षित ऑनलाइन स्पेस की आवश्यकता को लेकर एक मजबूत संदेश भी छोड़ गया। यह पहल साबित करती है कि छोटे-छोटे प्रयास भी समाज में बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
रन को सफल बनाने में सहयोगी संस्था की टीम – मोनिका, लाजवंती, प्रियंका, शारदा, धर्मेंद्र, निर्मला, बिंदु, उषा और मनोज –का विशेष योगदान रहा। टीम सदस्यों ने समुदाय के युवाओं को प्रेरित किया, कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की और सुनिश्चित किया कि संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे।

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