
दिनांक:-12 फरवरी 2026,
सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए एनसीसी कैडेट्स द्वारा निकाली गई जागरूकता रैली
-एनसीसी कैडेट्स द्वारा क्षेत्र के लोगों को फाइलेरिया दवा सेवन के लिए किया गया जागरूक
-फाइलेरिया एक बीमारी है जिससे सुरक्षा के लिए सभी लोगों को दवा खाना जरूरी : सिविल सर्जन
पूर्णिया जिले के सभी प्रखंडों में लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा फाइलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम एमडीए एवं आईडीए का संचालन किया जा रहा है।

लोगों द्वारा फाइलेरिया से सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा घर-घर पहुँचकर खिलाई जा रही है ।दवा का सेवन करने के लिए एनसीसी कैडेट्स द्वारा जागरूकता अभियान चलाया गया।
इस दौरान एनसीसी बटालियन 35 द्वारा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) से आसपास के क्षेत्रों में रैली निकालते हुए लोगों को फाइलेरिया सुरक्षा के लिए दवा सेवन करने के लिए जागरूक किया गया।
इस दौरान एनसीसी बटालियन के अधिकारियों के साथ साथ एनसीसी कैडेट्स के कर्मी, सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया, जिला भेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल, भीडीसीओ रवि नंदन सिंह, डीभीबीडीसी सोनिया मंडल, डब्लूएचओ जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ दिलीप कुमार और पिरामल स्वास्थ्य के कर्मी रणवीर कुमार सहित संबंधित कर्मी उपस्थित थे।

एनसीसी कैडेट्स को सम्बोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने कहा कि फाइलेरिया अभियान के लिए लोगों को जागरूक करने में सहयोग प्रदान करने के लिए सभी एनसीसी कैडेट्स धन्यवाद के पात्र हैं। सिविल सर्जन डॉ कनौजिया ने एनसीसी कैडेट्स को बताया कि फाइलेरिया एक बीमारी है जिससे सुरक्षा के लिए सभी लोगों को दवा खाना जरूरी है। फाइलेरिया बीमारी में लोगों का हाथ या पैर फूल जाता है और पैर या हाथ हाथीपांव जैसा हो जाता है। इसका कोई इलाज नहीं हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाथीपांव को रोकने के लिए जिले में एमडीए अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा घर-घर पहुँचकर सभी लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षा के लिए दवा खिलाई जा रही है। इस अभियान में 02 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बहुत गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों को छोड़कर अन्य सभी लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षा की दवाई का सेवन करना जरूरी है। एनसीसी में कार्यरत सभी लोगों को भी फाइलेरिया से सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराई जा रहे दवा का सेवन सुनिश्चित करना है। एनसीसी कैडेट्स द्वारा जागरूकता अभियान चलाने से लोग फाइलेरिया से सुरक्षा के प्रति जागरूक होते हुए दवाई सेवन सुनिश्चित कर फाइलेरिया ग्रसित होने से सुरक्षित रह सकेंगे।

फाइलेरिया को आमतौर पर हाथीपांव के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी मच्छर के काटने से होता है। फाइलेरिया बीमारी दूसरी सबसे ज्यादा विकलांग एवं कुरूपता कराने वाली बीमारी है। फाइलेरिया बीमारी शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है। इसमें हाथ, पैर, महिलाओं के स्तन और पुरुषों के हाइड्रोसील शामिल हैं। इसका संक्रमण अधिकतर बचपन में ही हो जाता है। इस बीमारी का पता चलने में 05 से 15 साल लग जाता है। पुरुषों के हाइड्रोसील फाइलेरिया ग्रसित अंगों का इलाज ससमय संभव है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों (हाथ, पैर, स्तन) में आया हुआ सूजन आमतौर पर लाइलाज होता है।

इस बीमारी से बचाव बहुत आसान है
लोगों को इस बीमारी से सुरक्षित रहने के लिए साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करते हुए फाइलेरिया ग्रसित होने से सुरक्षित रहते हुए कर सकते हैं। इन दवाइयों का सेवन स्वस्थ्य दिखने वाला हर कोई को सुनिश्चित करना चाहिए। लोगों द्वारा दवाइयों का सेवन अपने घर आने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही दवा खाते हुए करना सुनिश्चित करना चाहिए। यह दवाई लोगों को खाली पेट नहीं खाते हुए कुछ खाना खाने के बाद ही सुनिश्चित करना है। सभी दवाइयों का सेवन सिर्फ एक बार हीं करना है। कुछ लोगों पर दवा खाने से मामूली प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं जैसे – सिर दर्द, उल्टी, चक्कर, बुखार, दस्त इत्यादि। लोगों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि खुश होने की जरूरत है, क्योंकि इससे लोगों के शरीर के अंदर फाइलेरिया के कीड़े दवा खाने से मर रहे हैं इसके लक्षण हैं। दवा सेवन से लोग फाइलेरिया से सुरक्षित होते हुए स्वस्थ्य और सुरक्षित होकर स्वस्थ्य जीवन का लाभ उठा सकते हैं।

